Bhopal Encounter-Arshad Jamal Chairman Mau


भोपाल इन्काउण्टर की अदालती जाँच हो, पुलिस चाहती तो निहत्थों को कर सकती थी गिरफ्तार

घटना के वास्तविकता की जाँच कर न्याय हेतु सुप्रीम कोर्ट से एसआईटी के गठन की अपील-अरशद जमाल

मऊनाथ भंजन। आज मऊ नगर पालिका परिषद के पूर्व अध्यक्ष अरशद जमाल ने भोपाल में हुये स्टूडेंट इस्लामी मूवमेंट आॅफ इण्डिया (सीमी) से सम्बद्ध 8 कैदियों के फरार होने और उन्हें पुलिस द्वारा मारे जाने पर तश्वीश जाहिर की है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस की तरफ से प्राप्त सूचना के अनुसार इन कैदियों के पास से कोई ऐसा हथियार बरामद नहीं हुआ है जिसके चलते पुलिस के लिये उन फरार कैदियों को गिरफ्तार करना जोखिम भरा होता। फरार निहत्थे कैदियों को मारने के बजाय उन्हें पकड़ना आसान था, पर उनको पुनः पकड़ने का प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि इण्काउण्टर की यह कहानी सही नहीं, इस लिये इस की न्यायिक जाँच होनी चाहिये ताकि वास्तविकता सामने आ सके। इसका सबूत टेलीविजन में दिखाई जाने वाली वीडियों में साफ नजर आता है। इस इण्काउण्टर की वीडियो सामने आजाने से फेक इण्काउण्टर का शक पुख्ता हो गया है। इस लिये उक्त कैदियों के फरार होने और फिर उन्हें मारे जाने के पीछे की कवायद की अदालत द्वारा निष्पक्ष जाँच करायई जानी चाहिये। भोपाल में पुलिस के इण्काउण्टर में मारे जाने वाले कैदियों के बारे में अदालती जाँच की माँग करते हुये उन्होंने कहा कि यह मुदभेड़ सही नजर नहीं आती इस लिये इस मामले में मैं सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध करता हूँ कि इस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट स्वयं अपने स्तर से मामले को संज्ञान में लेते हुये एसआईटी का गठन कर किसी रिटायर्ड जज द्वारा अपनी निगरानी में इस की निष्पक्ष तहकीकात करायेे ताकि घटना की वास्तविकता देशवासियों के समक्ष आ जाये और बिरादराने वतन के साथ ही मुसलमानों में व्याप्त बेचैनी दूर हो जाये। श्री जमाल ने कहा कि बेजेपी की केन्द्र सरकार में मुसलमानों को लगातार यह संकेत दिया जा रहा है कि अब न तो उनका दीन महफूज है और न ही इनकी जानें। इस लिये अब न्याय प्राप्ति का एक मात्र न्यायालय ही सहारा है। इस लिये हमारा अनुरोध है कि सुप्रिम कोर्ट स्वयं हस्तक्षेप करे ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।