गोश्तबन्दी को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच के फैसले पर अरशद जमाल का मऊ में हुआ भब्य स्वागत


गोश्तबन्दी को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच के फैसले पर अरशद जमाल का मऊ में हुआ भब्य स्वागत
मऊनाथ भंजन। कल गोश्तबन्दी के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के फैसले के बाद आज लखनऊ से अपनी वापसी के दौरान जब पूर्व पालिका अध्यक्ष अरशद जमाल मिर्जाहादीपुरा चैक पहुँचे तो कुरैशियों और मुकामी लोगों ने उनका भब्य स्वागत करते हुये उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया। श्री जमाल के स्वागत में एकत्रित जनसमूह में लोगों को यह कहते हुये सुना गया कि अरशद जमाल ने ऐसे संकट के समय जब हमारी रोजी रोटी बन्द हो चुकी थी और कोई हमारी सुधबुध लने वाला नहीं था, तो इन्होंने हमारे लिये स्वयं कानूनी लड़ाई लड़कर हमें पुनः जीवन की ओर लौटाया है।

 इस अवसर पर पूर्व पालिका अध्यक्ष श्री अरशद जमाल ने उनके स्वागत हेतु उमड़ी भीड़ का आभार व्यक्त करते हुये कहा कि एन.जी.सी. और सुप्रिमकोर्ट के निर्देश के बाद पूरे प्रदेश में सलाटर हाउस चलाने और मांस की बिक्री पर रोक लगी हुयी थी। उन्होंने कहा कि जब तक उ0प्र0 में समाजवादी सरकार थी तब तक लोगों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं उठानी पड़ी। मगर प्रदेश की सत्ता बदलते ही भाजपा ने अपने संकल्प पत्र की घोषणा के अनुसार सभी बूचड़ खाने और मांस की बिक्री पर कड़ाई से रोक लगा दी। सुप्रिम कोर्ट के दूसरे आदेश के अनुसार उ0प्र0 की पिछली सरकार ने सलाटर हाउसों के उच्चीकरण का कार्य शुरू कर दिया था। नगरीय निकायों द्वारा बूचड़ खानों के प्रस्ताव को स्वीकृति के लिये बनायी गयी हाई पावर कमेटी ने कई बूचड़ खानों को अनुमति भी प्रदान की और फंड भी जारी किया। इस सम्बन्ध में पूर्व चेयर मैन अरशद जमाल द्वारा मऊ नगर पालिका परिषद से वांछित मशीनों व वांछित निर्माण हेतु 5 करोड़ रूपये का प्रस्ताव भी जनपद स्तरीय समिति से स्वीकृति के बाद शासन को अग्रसारित किया गया था। मऊ से शासन को भेजे गये डी.पी.आर. के अनुसार बने हुये वध शाला के भवन को बातानुकूलित करना, भैंस को काटने के लिये संयन्त्र लगाना, गन्दे पानी को साफ करने के लिये ट्रीटमेंट प्लान्ट लगाना, भैंसों को बांधने एवं उनकी जाँच के लिये एक नैरेज का निर्माण करना, सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिये आवश्यक कमद उठाना, बड़ा डिफ्रिजर व जनरेटर लगाने जैसी योजनाओं को पूर्ण करके सलाटर हाउस को चालू करने की योजना पर कार्य कराया जाना शामिल है।

 उन्होंने कहा कि सरकार बदलते ही सारी योजनाओं पर रोक लगा दी गयी। पूर्व पालिका अध्यक्ष अरशद जमाल ने बताया कि इस रोक से परेशान हो कर मीट दुकानदारों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मीट की दुकानों के लाइसेंस बनाने व लाइसेंस के नवीनीकरण पर लगी रोक के विरूद्ध कई रिट पेटीशन दाखिल किया था, जिस में पहली याचिका मुहम्मद मुस्तफा लखीमपुर के नाम से दाखिल की गयी थी। मगर इन याचिकाओं में कोई भी जनहित याचिका सलाटर हाउस की अनुमति के लिये नहीं की गयी थी। किसी भी याचिकाकर्ता ने अपने पक्ष में मजबूत सबूत नहीं लगाया था, जिससे कि सरकार को घेरा जाता। श्री जमाल ने बताया कि जब लखनऊ पहुँचकर मैने याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं से वार्ता की तो मुझे  इस कमजोरी का एहसास हुआ और मैने स्वयं मऊ के सलाटर हाउस को चालू करने के लिये अपने नाम से जनहित याचिका करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि इसके लिये लखनऊ में 2 दिन रुक कर मैंने जरूरी कागजात और सबूत भी उपलब्ध कराये। इसका नतीजा यह हुआ कि सबूत के अभाव में जहाँ सभी अधिवक्ता मायूस नजर आ रहे थे वहीं कागजात एवं सबूत की उपलब्धता के बाद उनके अन्दर एक नई उर्जा आ गयी। उन्होंने बताया कि चार दिनों तक चली इस बहस के बाद जो निर्णय आया उस में स्पष्ट तौर से कहा गया है कि किस को क्या खाना है यह तय करना सरकार का काम नहीं है। अगर लोग मांसहार खाना चाहते हैं तो सरकार का दायित्व बनता है कि वह नियमों और न्यायालय के आदेश के अनुसार सलाटर हाउस बनाये और लाइसेंस जारी करे। श्री जमाल ने अवगत कराते हुये कहा कि माननीय न्यायालय के दो जजों की बेंच ने अपने 83 पन्नों के निर्णय में पेज नं0 6 के इलावा और भी कई स्थानों पर मेरे द्वारा की गयी माँगों और नगर पालिका परिषद, मऊ का जिक्र करते हुये उ0प्र0 सरकार, समस्त मण्डलायुक्त, समस्त जिलाधिकारियों और समस्त नगर पालिका अध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि 17 जुलाई 2017 से पहले सलाटर हाउसों को चालू करने, मीट की दुकानों का लाइसेंस देने या उनका नवीनीकरण करके आदालत में पेश हो कर रिपोर्ट करना सुनिश्चित करें। अरशद जमाल ने बताया कि कोर्ट ने यह भी कहा है कि जब तक सलाटर हाउस निर्मित नहीं हो जाते तब तक सरकार और नगरीय निकाय मांसाहार उपयोग करने वाले लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये रास्ता निकालने पर भी विचार करें। पूर्व पालिका अध्यक्ष ने इस सम्बन्ध में बताया कि कुल 27 याचिकाओं में से 26 व्यक्तिगत याचिकायें हैं और अरशद जमाल द्वारा दायर याचिका ही एक मात्र जनहित याचिका है, जिस पर न्यायालय द्वारा यह निर्णय लिया गया है। श्री जमाल ने बताया कि उ0प्र0 सरकार इस फैसले के फिलाफ सुप्रिम कोर्ट जा सकती है इस लिये मैंने पूर्वापाय के रूप में दिल्ली में अपने अधिवक्ता से बात करके केविएट तैयार करने को कहा है। अगले सोमवार या मंगलवार को मेरी तरफ से माननीय सर्वाेच्च न्यायालय में केविएट भी दाखिल कर दिया जायेगा।

इस मौके पर कुरैशियों, नगर वासियों एवं क्षेत्रीय लोगों की एक बड़ी भीड़ श्री अरशद जमाल  को उनके इस अद्वितीय कार्य के प्रति उनका स्वागत करने एवं आभार व्यक्त करने हेतु यहां पहुँची थी, जिसमें अदालत के इस निर्णय से हर्ष व उल्लास साफ नजर आ रहा था। श्री जमाल ने भी उनका अभिवादन स्वीकार करते हुये जनहित में कर्तब्यों एवं जिम्मेदारियों के निर्वहन के प्रति अपने संकल्पों को पूरा करते रहने की यकीन देहानी करायी।

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