बर्मा में रोहनिया मुसलमानों पर वहां की सेना द्वारा किये जरहे ज़ुल्म के खिलाफ जमीयतुल उलमा का इजलासे आम- Arshad Jamal



बर्मा में रोहनिया मुसलमानों पर वहां की सेना द्वारा किये जरहे ज़ुल्म के खिलाफ जमीयतुल उलमा का इजलासे आम


मऊनाथ भंजन- बर्मा में रोहनिया मुसलमानों पर वहां की सेना द्वारा किये जरहे ज़ुल्म के खिलाफ जमीयतुल उलमा का एक अहतेजाजी इजलासे आम किया गया।  ज्ञात हो कि उन महाजरीन की कुल 13 लाख की आबादी में लगभग एक लाख हिन्दू भी है। उनके साथ भी वैसा ही सलूक किया जारहा है, क्यों के अंग्रेज़ो की होकूमत में नोकरी के नाम पर सबको हिंदुस्तान से सैकड़ो साल पहले भेजा गया था। आज तक उनको वहां की नागरिकता नही दी गई इन मज़लूमों को अलगाव वादी कहकर नसलकुशी की जारही है।




भले ही उस वक्त भारत एक था आज पाकिस्तान बंगलादेश को लेकर 3 हिस्सो में हो गया है, भारत सबसे बड़ा है इसलिये इनको चाहिये कि इस मामले मे मदाखलत करे। बौद्ध धर्म बहुल देश म्यांमार में अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों की अनुमानित संख्या 13 लाख है और वे ज्यादातर देश के तटीय राज्य रखीने के उत्तरी हिस्से में रहते हैं जिसकी सीमा बांग्लादेश से लगती है। म्यांमार सरकार उन्हें बांग्लादेश के ‘अवैध प्रवासी‘ मानती है और वे नागरिकता के अधिकारों से वंचित हैं। सदियों से वहॉं रहने के बावजूद म्यांमार सरकार ने उन लाखों लोगों को नागरिकता के अधिकार से वंचित रखा है, ये बिना किसी नागरिकता के रोहिंग्यन मुसलमान दुनिया के सबसे मज़लूम अल्पसंख्यक हैं। बोद्ध आतंकवादियों और वहॉं की सेना कभी इनके घर जलाती है, कभी गोलियों से भून देती है, कभी माओं और बहनों की इज़्ज़त लूटती है, ये लोग किसी तरह बच के समुंदरी रास्ते से दूसरे देशों में भाग कर शरणार्थी बनते हैं, भागने की कोशिश में कई मारे जाते हैं, कईयों की नावें समुंदरों में समा जाती हैं।
म्यांमार की नेता आंग सांग सू की को नोबेल का पीस प्राइज़ मिला है। लेकिन वो इस ज़ुल्म को रोकने की बजाये रोहिंग्या के लोगों को आतंकवादी बता कर उन पर ज़ुल्म को बढ़ावा दे रही हैं। दुनिया के तमाम अमनपसंद आंग साम सू की के खिलाफ मुज़ाहिरा कर रहे हैं। रोहिंग्या के शरणार्थी भारत में भी है जिनको भारत ने वापस उसी नरक में भेजने का ऐलान किया था तो UN की तरफ से भारत के इस ऐलान की कड़ी निंदा की गयी थी। हमारे देश के प्रधानमंत्री मोदी जी अभी कुछ दिन पहले ही म्यांमार दौरे पर थे लेकिन अफसोस की बात है कि दशिण एशिया के एक मज़बूत देश के लीडर होने के बाद भी उन्होंने रोहिंग्या संकट पर कोई बात नहीं की, न ही रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे ज़ुल्म, उनके नरसंहार पर कोई आधिकारिक बयान जारी कर म्यांमार सरकार पर हिंसा रोकने का कोई दबाव बनाया है।



बर्मा के बगल में इंडोनेशिया, मलेशिया, बंगलादेश मुस्लिम मुमालिक है। पाकिस्तान की ख़ामुशी भी मानीख़ेज़ है।


अरशद जमाल, पूर्व चेयरमैन